सागर (आशुतोष सोनी)। साइबर अपराधों के खिलाफ चलाई जा रही मुहिम के तहत सागर पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने बेरोजगार युवकों के नाम पर फर्जी फर्में और ‘म्यूल‘ बैंक खाते खोलकर करोड़ों रुपये का ऑनलाइन सट्टा व साइबर ठगी संचालित करने वाले एक बड़े संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। मामले का खुलासा करते हुए पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस कार्रवाई में 2 करोड़ 69 लाख रुपये से अधिक नकद, 30 लाख रुपये का सोना और एक नोट गिनने की मशीन बरामद की गई है।
कैसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा?
मामले की शुरुआत थाना मकरोनिया में दर्ज रोहित पटेल नामक युवक की शिकायत से हुई। फरियादी ने बताया कि उसके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर ‘ग्लैमर इंटरप्राइजेस’ नाम से एक फर्जी फर्म बनाई गई और फेडरल बैंक मकरोनिया शाखा में करंट अकाउंट खोल लिया गया। जब पुलिस ने बैंक खाते के वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की, तो महज छह महीनों के भीतर करीब 90 लाख रुपये के संदिग्ध ट्रांजेक्शन का पता चला।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बीना जयवीर सिंह भदौरिया व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सागर नरेंद्र सोलंकी के मार्गदर्शन में मकरोनिया थाना प्रभारी नितिन पाल के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया।
आरोपी तक पहुँचने और नेटवर्क की कड़ियाँ
जांच के दौरान पुलिस ने सबसे पहले धर्मेंद्र नाहर और सोनू दांगी को हिरासत में लिया। कड़ी पूछताछ में आरोपियों ने कबूला कि उन्होंने भोपाल के अमित विश्वकर्मा से यह काम सीखा था। गिरोह सामान्य और बेरोजगार युवकों को कमीशन और पैसों का लालच देकर उनके दस्तावेज हासिल करता था और फर्जी फर्में बनाकर निजी बैंकों में करंट अकाउंट खुलवाता था। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी और ऑनलाइन बेटिंग के पैसों को घुमाने के लिए म्यूल अकाउंट के रूप में किया जाता था।
पुलिस टीम ने भोपाल में दबिश देकर मुख्य सट्टा संचालक ऋषभ पटेल को गिरफ्तार किया। ऋषभ के ठिकाने से पुलिस ने 2.69 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी और 30 लाख रुपये मूल्य का सोना बरामद किया।
टेलीग्राम और फर्जी वेबसाइटों से सट्टे का खेल
पूछताछ में आरोपी ऋषभ पटेल ने खुलासा किया कि वह भोपाल से बैठ कर [www.20wicket.com](https://www.20wicket.com) और www.goexch99.comhttps://www.goexch99.com जैसी सट्टा वेबसाइटों का संचालन कर रहा था। उसने टेलीग्राम ऐप पर ग्राहकों के कई ग्रुप बना रखे थे, जहाँ वह एडमिन बनकर ऑनलाइन बेटिंग के पैनल लिंक और क्रेडिट कॉइन भेजता था। फर्जी फर्मों के बैंक खातों के जरिए पैसा ऑनलाइन ट्रांसफर कराया जाता था और बाद में उसे कैश करा लिया जाता था।
30 से अधिक फर्जी फर्में और 5.50 करोड़ का ट्रांजेक्शन
पुलिस की तकनीकी जांच और वित्तीय विश्लेषण में अब तक 30 से अधिक फर्जी फर्मों (जैसे भूपेन्द्र इंटरप्राइजेस, सूर्या इंटरप्राइजेस, समृद्धि टूर एंड ट्रेवल्स, महाकाल ट्रेडर्स, बालाजी ट्रेडर्स आदि) का पता चला है। इन खातों से अब तक 5.50 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन सामने आ चुका है।
पुलिस की अपील और आगे की कार्रवाई
मामले में गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है ताकि गिरोह के अन्य सहयोगियों का पता लगाया जा सके। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इन फर्जी फर्मों के पंजीयन और बैंक खाते खोलने में किन-किन संस्थाओं या व्यक्तियों की लापरवाही या सांठगांठ रही है।
सागर पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति को पैसों या कमीशन के लालच में आकर अपना बैंक खाता, एटीएम, पासबुक, चेकबुक या ओटीपी साझा न करें। अपने नाम से बनी फर्म या बैंक खाते का संचालन किसी अन्य व्यक्ति को देना कानूनन अपराध है और ऐसे मामलों में खाताधारक भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है।



