मकरोनिया। श्रावण के पावन माह में मकरोनिया स्थित अवदूत आश्रम भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर नजर आया। आश्रम में चल रही रामकथा के चौथे दिवस भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। राम जन्म का प्रसंग आते ही कथा स्थल जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा और श्रद्धालु भक्ति में भावविभोर हो गए।रामकथा व्यास श्री शिवम दुबे जी महाराज ने भगवान श्रीराम के धरती पर अवतरण के कारणों का रोचक और भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब-जब धरती पर अधर्म का प्रभाव बढ़ता है और धर्म की मर्यादाएं संकट में पड़ती हैं, तब भगवान विभिन्न रूपों में अवतार लेकर धर्म की स्थापना और समाज को सत्य एवं मर्यादा का मार्ग दिखाते हैं।कथा के दौरान श्रीराम जन्म का प्रसंग आते ही वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के जन्म की खुशी में जयघोष किया और एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं। आश्रम परिसर में भक्ति, संगीत और कथा का ऐसा संगम देखने को मिला कि पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।
कथा के बाद निकली भव्य शिव पालकी यात्रा
रामकथा की समाप्ति के बाद धार्मिक आयोजन का अगला आकर्षण भव्य शिव पालकी यात्रा रही। मुख्य यजमान श्री रुक्मणि -गणेशदत्त तिवारी एवं आश्रम के महंत श्री ब्रह्मचारी जी महाराज के सानिध्य में पालकी यात्रा अवदूत आश्रम से प्रारंभ होकर शिव शक्ति मंदिर, आनंद नगर तक निकाली गई।
श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा के साथ शिव पालकी में सहभागिता की। यात्रा के दौरान भक्तिमय वातावरण बना रहा और मार्ग में श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के जयकारे लगाए। श्रावण माह में निकली इस धार्मिक यात्रा ने क्षेत्र के वातावरण को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया।
रामकथा और शिव आराधना का अद्भुत संगम
आयोजन की विशेषता यह रही कि एक ओर जहां रामकथा में भगवान श्रीराम के जन्म और उनके अवतार के उद्देश्य का वर्णन हुआ, वहीं कथा के उपरांत भगवान शिव की पालकी यात्रा ने आयोजन को और अधिक भव्य बना दिया। श्रद्धालुओं के लिए यह दिन कथा, भक्ति, उत्सव और शिव आराधना का सुंदर संगम बन गया।
आयोजकों के अनुसार ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक चेतना, संस्कार और आपसी सद्भाव को मजबूत करने का माध्यम बनते हैं। श्रावण माह में आयोजित रामकथा और शिव पालकी यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता ने आयोजन को विशेष बना दिया।



